6 सितम्बर पितृ पक्ष की शुरुआत, श्राद्ध पूर्वजों की सेवा करने का अवसर

आज से पितृ पक्ष शुरू हो रहे है| श्राद्ध के यह दिन अपने पूर्वजों की सेवा करने का अवसर भी देते हैं और प्रकर्ति ,  समाज और  जीवो के लिये हमारी जिम्मेदारीयो का अनुसरण भी कराते है पितृ पक्ष आज 6 सितम्बर से शुरू हो रहा है 6 सितम्बर से 20 सितम्बर तक पड़ रहा है पितृ पक्ष ऑर कहते हैं कि जब पुरखों की आत्माओं का आशीर्वाद इंसान को जिंदगी में मिलता रहता है, तो उसके जीवन में खुशियां ही खुशियां बनी रहती हैं

 ऐसा माना जाता है कि आकाश से हमारे पुरखे व धरती पर हमारे बुजुर्ग अपनी दुआओं से हमारे जिंदगी में रौशनी बिखेरते रहते है पिशाचमोचन कुंड पर ब्राह्मण पितरों के श्राद्ध के लिए विधि विधान से ही पूर्वक तर्पण आदि करना सभी के लिए बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है जिससे जीवन खुशी - खुशी बना रहे काशी नगरी धर्म और आध्यात्म वैसे तो मोक्ष की नगरी के नाम से भी जानी जाती है|

ऐसा भी कहा जाता है कि यहा प्राण त्यागने वाले हर इंसान को शंकर भगवान खुद मोक्ष देते  है लेकिन जो लोग काशी से बाहर या काशी में अकाल प्राण त्यागते हैं उनके मोक्ष की कामना काशी से की जाती है ऑर काशी के पिशाच मोचन कुण्ड पर त्रि पिंडी श्राद्ध किया जाता है। काशी के अलावा भी पिशाच मोचन कुण्ड पर भी त्रिपिंडी श्राद्ध होता है

त्रिपिंडी श्राद्ध जो पितरों को प्रेत बाधा और अकाल मृत्यु से मरने के बाद व्याधियों से मुक्ति दिलाता है। इसीलिये पितृ पक्ष में तीर्थ स्थली पिशाच मोचन पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है

श्राद्ध के प्रकार, श्राद्ध 12 प्रकार के होते हैं
(1) नित्य
(2) नैमित्तिक
(3) काम्य
(4) वृद्धि
(5) सपिण्डन
(6) पार्वण
(7) गोष्ठ
(8) शुद्धयर्थ
(9) कमांग
(10) दैविक
(11) औपचारिक
(12) सांवत्सरिक श्राद्ध

पितृपक्ष में हर दिन पितरों को पिण्डदान व तर्पण करने की धार्मिंक मान्यता निभायी जाती है पितरो का पिण्डदान व श्राद्ध कर्म से जहां पितृ ऋण से मुक्ति का मार्ग पा लेते हैै वही पितरों से धन-धान्य व यश की प्राप्ति प्राप्त हो जाती है ऑर  आशीष का द्वार भी खुल जाता है इसलिए यह पूरी श्रद्धा के साथ किया जाता है|

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