पहली से आठवीं कक्षा तक संस्कृत अनिवार्य

उत्तराखंड में योग शिक्षक बनने के लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान अनिवार्य है उत्तराखंड सरकार का कहना यह है कि राज्य में संस्कृत भाषा के लिए कोई काम नहीं हुआ है जो होना चाहिए था। कहां जा रहा है कि देवभाषा सुधारने के लिए एक अभियान रचा जा रहा है जिसमें संस्कृत भाषा को पहली कक्षा से आठ वीं कक्षा तक अनिवार्य कर दिया गया है दो साल बाद इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा।

इसके साथ-साथ विदेशों में भी संस्कृत का प्रचार-प्रसार किया जाएगा राज्यों के स्कूली शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने यह कहां है कि राज्य की दूसरी भाषा संस्कृत भाषा है लेकिन इसके लिए कोई भी काम नहीं किया गया जो किया जाना था। उन्होंने कहा कि संस्कृत का प्रचार भी योग की तरह ही किया जाएगा ताकि दुनिया भर में संस्कृत प्रचार पहुंच जाएं शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने यहां भी कहां है कि बिना संस्कृत ज्ञान के योग शिक्षक नहीं बन सकते हे।

योग शिक्षक बनने के लिए संस्कृत का ज्ञान अनिवार्य है राज्य के सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से आठवी कक्षा तक संस्कृत को स्कूल पाठ्यक्रम में अनिवार्य हिस्सा बनाए जाने की तैयारी की जा रही है। खेलकूद ,  युवा कल्याण और पंचायती राज में सभी नाम की है  हेडिंग संस्कृत में ही होगी सचिवालय समेत हर विभागों में संस्कृत नाम की पटटियां भी होंगी शिक्षा मंत्री अरविंद पांड ने यह कहा कि इसके लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

संस्कृत को और भी ज्यादा बढ़ाने के लिए  संस्कृत  उत्थान के लिए वे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी बात करेंगे गढवाल मंडल और कुमाऊं मंडल में भी संस्कृत के एक-एक विद्यालय खोले जाएंगे। इसके अलावा विभागों का नाम भी संस्कृत में अंकित किया जाएगा हिंदी में विभाग का नाम और नीचे संस्कृत में विभाग का नाम लिखा जाएगा।

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