नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) NEET paper 2017

नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) NEET paper 2017

निचली न्यायपालिका में जजों की भर्ती के लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) जैसी परीक्षा कराने का प्रस्ताव किया है। खास बात यह है कि अखिल भारतीय न्यायिक सेवा गठित करने के इस 60 साल पुराने प्रस्ताव का भाजपा शासित राज्यों समेत सात प्रदेश विरोध कर रहे हैं।

31 दिसंबर, 2015 को जारी आंकड़ों के मुताबिक, देशभर की अधीनस्थ अदालतों में जजों के पद स्वीकृत हैं, जिनमें से पद रिक्त हैं। कानून मंत्रलय के सचिव (न्याय) की ओर से सुप्रीम कोर्ट के महासचिव को लिखे एक पत्र के मुताबिक, ‘स्नातक और स्नातकोत्तर के चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीबीएसई द्वारा अपनाए गए नीट मॉडल पर विचार किया जा सकता है। नीट की प्रक्रिया के मुताबिक प्रवेश परीक्षा कराने, परिणाम की घोषणा और अखिल भारतीय रैकिंग तैयार करने की जिम्मेदारी सीबीएसई की है।’

दरअसल, 8 अप्रैल को त्वरित न्याय पर सरकार और न्यायपालिका के प्रतिनिधियों के बीच हुए विचार-विमर्श के बाद मंत्रलय ने यह पत्र लिखा है। इस बैठक में निचली अदालतों में रिक्त पदों के मसले पर भी विचार किया गया था। शीर्ष अदालत के न्यायाशीध आदर्श गोयल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में केंद्रीय चयन प्रणाली जैसे भर्ती के वैकल्पिक तरीकों का सुझाव दिया गया था।

 वर्तमान में न्यायिक अधिकारियों की भर्ती के लिए विभिन्न हाई कोर्ट और राज्य सेवा आयोग परीक्षा का आयोजन करते हैं।
मालूम हो कि ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज की तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर की न्यायिक सेवा के गठन की केंद्रीय योजना पर सबसे पहले 1960 में विचार-विमर्श किया गया था, लेकिन विभिन्न पक्षों में जारी मतभेदों के चलते यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी।एक ‘भर्ती संस्था’ के जरिये ‘केंद्रीकृत परीक्षा’ कराई जाए। ये संस्था सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कार्य कर सकती है।

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से परीक्षा आयोजित कराने के लिए कहा जा सकता है। इसके लिए यूपीएससी सभी हाई कोर्ट की सलाह से प्रक्रिया व तौर-तरीकों में बदलाव भी कर सकता है। 1पद जजों के स्वीकृत हैं देशभर की अधीनस्थ अदालतों मेंइंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड पर्सनल सिलेक्शन के कुछ तौर-तरीकों को अपनाया जा सकता है।

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