भारतीय सेना जवानो ने जान जोखिम में डाल कर एवरेस्ट लहराया तिरंगा Indian army team climb mount everest without using oxygen cylinders

भारतीय सेना जवानो ने जान जोखिम में डाल कर एवरेस्ट लहराया तिरंगा  Indian army team climb mount everest without using oxygen cylinders

भारतीय सेना के जवान देश की सीमाओं पर तो अपनी बहादुरी का करतब दिखाते नजर आते हैं लेकिन इस बार भारतीय सेना के जवानों ने एवरेस्ट फतह का एक नया इतिहास रचा है। बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के 14 सदस्य कमेटी ने एवरेस्ट फतह कर वहाँ तिरंगा फहराया है।

 भारतीय सेना के जवानों की इस बहादुरी पर देश उनको सलाम कर रहा है बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के एवरेस्ट फतह करने वाले यह वीर जवान भारतीय सेना के बहादुर रणबांकुरे बताया जा रहे हैं। जिनका मिशन बिना ऑक्सीजन के मिशन फतह  करना था लेकिन उनको यह काम अभी बेहद कठिन परिश्रम के बाद मिली है बताया जा रहा है।

 भारतीय सेना के यह जवान एवरेस्ट फतह करने के लिए कई दिन पहले निकले थे उनकी यह यात्रा काठमांडू से लेकर कई राज्यों को पार करती हुई एवरेस्ट तक पहुंची थी जहां भारतीय जवानों ने 14 लोगों की टीम में इसे सिर्फ चार लोग ही एवरेस्ट फतह करने में कामयाब हो पाए हैं।

उनकी इस विजय पताका को भारतीय सेना में काफी बहादुरी के रूप में देखा जा रहा है देश की सीमाओं पर हमारे जवान हमेशा ही अपना बहादुरी का परचम लगाते रहे हैं। लेकिन अब सबसे बड़ी एवरेस्ट चोटी पर भी भारत का झंडा फहराने वाले भारतीय सैनिकों की बहादुरी का परचम पूरे देश में लहराया जा रहा  है सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरों को वायरल कर दिया गया है।


टीम के जवान कंचोक टेंडा, केल्शांग दोरजी, कल्डेन पंजूर और सोनम फुनसोक हैं। कुल 14 सदस्यों की इस टीम में से तीन और पर्वतारोहियों उरगेन टॉपीगी, न्वांग गेलेक और कर्म जोपा ने ऑक्सीजन की मदद से यह चढ़ाई पूरी कर ली।

कर्नल विशाल दुबे ने पीटीआई से बात करते हुए बताया कि, 'हम लोगों ने बिना ऑक्सीजन इस्तेमाल किये दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर फतह करने के लिए 10 लोगों की टीम बनाई थी, जिनमें से हम 4 लोगों को भेजने में सफल रहे।' उन्होंने बताया, कि यह पहली बार था कि किसी भी टीम ने एवरेस्ट पर बिना ऑप्शन के ऑक्सीजन के चढ़ने का प्रयास किया था। कर्नल दुबे ने बताया कि, ‘हमारा उद्देश्य ऑक्सीजन सिलेंडर के बिना एवरेस्ट पर चढ़ने और इतिहास बनाना है।‘

अभी तक 4000 से अधिक लोगों ने 8848 मीटर की चोटी पर चढ़ाई की है, लेकिन इनमें से 187 लोगों ने ऑक्सीजन के बिना यह कारनामा कर दिखाया है। इस अभियान में शामिल 6 शेरपा गाइड भी सप्लीमेंट ऑक्सीजन के साथ दुनिया के शीर्ष पर पहुंचे। इस टीम ने 21 मई को चढ़ाई प्रारंभ की थी जो कि शुक्रवार को वापस काठमांडू लौटी।

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