बद्रीनाथ धाम की कथा, कहानी बद्रीनाथ धाम की - Badrinath Dham Story

बद्रीनाथ धाम की कथा, कहानी बद्रीनाथ धाम की - Badrinath Dham Story:- बद्रीनाथ भगवान श्री बदरीनाथ जी की पूजा में लेप और अखंड ज्योति के लिए सदियों पुरानी परंपरा नरेंद्रनगर राजमहल में विधिविधान से पूर्ण हुई। महारानी के सानिध्य में सुहागिनों ने ढोल-दमाऊं की थाप पर सिलबट्टे में तिल पीसकर तेल निकाला। तेल कलश यानी गाडू घड़ा को राजमहल से ऋषिकेश के लिए रवाना किया गया। प्राचीन काल से ही यह परंपरा रही है कि बदरीनाथ जी के कपाट खुलने से पूर्व भगवान विष्णु के बैकुंठ धाम बदरीनाथ में बदरीविशाल के लेप और अखंड ज्योति के लिए तिलों का तेल नरेंद्रनगर राजमहल से निकाला जाता है।

परंपरा के मुताबिक इस पौराणिक प्रक्रिया से ही बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की शुरुआत मानी गई है। शनिवार की सुबह राजपुरोहित संपूर्णानंद जोशी ने विधिवत पूजा अर्चना संपन्न कराई। जिसके बाद टिहरी सांसद महारानी राज्यलक्ष्मी शाह की अगुवाई में करीब 50 महिलाओं ने सिलबट्टे पर पिसकर तिलों का तेल निकाला। ढोल-दमाऊं की थाप पर पीले वस्त्र धारण किए सुहागिनों ने तिल के तेल को गाडू घड़ा यानी कलश में एकत्र किया।

इस मौके पर महाराजा मनुजेंद्र शाह, प्रतापगढ़ की पूर्व सांसद व महारानी की ननद राजकुमारी रत्ना सिंह, श्री गंगा एवं पर्यावरण सुरक्षा समिति अध्यक्ष चंद्रवीर सिंह पोखरियाल, श्री बदरीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के शरद कुमार डिमरी, बुद्धि प्रकाश डिमरी, ऋषि कुमार डिमरी, अर¨वद डिमरी, पालिकाध्यक्ष नरेंद्रनगर दुर्गा राणा, कृषि मंत्री सुबोधउनियाल की धर्मपत्नी सुमन उनियाल, हेमचंद डिमरी आदि मौजूद रहे।

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