एनएच-74 घोटाला : त्रिवेंद्र सरकार का ‘लिटमस टेस्ट’ - NH-74 scam Trivandrum's 'litmus test'

एनएच-74 घोटाला : त्रिवेंद्र सरकार का ‘लिटमस टेस्ट’:- उधमसिंह नगर जिले में हाल ही में सामने आया एनएच-74 (राष्ट्रीय राजमार्ग-74) घोटाला त्रिवेंद्र सरकार के लिए 'लिटमस टेस्ट' बनने जा रहा है। एनएच-74 के चौड़ीकरण में हुए घोटाले में अभी तक जो तथ्य सामने आए हैं, उनके मुताबिक भू-माफिया, नौकरशाह तथा राजनेताओं के गठजोड़ ने सरकारी खजाने को 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लगाई है। कुमांऊ कमिश्नर ने इस पूरे घोटाले को लेकर एक प्राथमिक रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। इस रिपोर्ट में घोटाले की पुष्टि तो की ही गई है, साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।

दरअसल इस घपले में परियोजना के अधीन आने वाली कृषि भूमि को गैर कृषि भूमि दिखा कर बैक डेट में अभिलेखों में दर्ज किया गया। इसके कारण सरकार को मुआवजे के रूप में कई गुना अधिक धनराशि का भुगतान करना पड़ा। शुरुआती दौर में इस घपले को राजस्व विभाग के निचले स्तर के अधिकारियों, कर्मचारियों तक ही जुड़ा माना जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे तथ्य सामने आते गए, इसमें शामिल लोगों का दायरा भी बढ़ता चला गया। जिस तरह से पूरे मामले में बड़े अधिकारियों, सपेदपोशों और जमीन के सौदागरों का दखल सामने आ रहा है, वह वाकई हैरान करने वाला है।

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यूं तो प्रदेश में हर सरकार के कार्यकाल में हुए घोटालों की लंबी फेहरिस्त है, लेकिन इस घोटालो को तो बड़े दुस्साहसिक तरीके से सरकारी अभिलेखों में हेर-फेर करके अंजाम दिया गया। हकीकत यह है कि घोटाले के तार सियासतदांओं से भी जुड़े हैं। चुनाव के दौरान प्रदेश कांग्रेस का एक बैंक में खुला खाता और उसमें इस परियोजना के तहत मुआवजा पाने वाले लाभार्थियों द्वारा मोटी रकम जमा किया जाना अपने आप में कहानी समझने के लिए एक बड़ा तथ्य है। साफ है कि सियासी संरक्षण और बड़े अधिकारियों की सरपरस्ती के बिना यह संभव नहीं हो सकता। हालांकि घोटाला सामने आने के बाद निचले स्तर पर कार्रवाही भी शुरू हो चुकी है, लेकिन सच तो यह है कि ये मामला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है।

इस बड़े घोटाले को ‘बड़े एक्शन’ की दरकार है। जो भी बड़े लोग इस घोटाले में शामिल हैं, उन सभी का पर्दाफाश जरूरी है। इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि कल इस घोटाले की आंच त्रिवेंद्र सरकार तक भी पहुंच जाए। बहरहाल कुमाऊं कमिश्नर ने इस मामले की रिपोर्ट सरकार तक पहुंचा दी है, जिस पर अब आगे का एक्शन सरकार को ही लेना है। इस लिहाज से देखें तो एनएच-74 घोटाला सही मायनों में त्रिवेंद्र सरकार की परीक्षा है। मुख्यमंत्री मनोनीत होने के बाद अपने पहले बयान में त्रिवेंद्र ने जिस भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का वादा किया, उसे अमली जामा पहनाने के लिहाज से भी यह बड़ा ‘अवसर’ है। देखने वाली बात होगी कि इस बड़े ‘अवसर’ को त्रिवेंद्र किस तरह लेते हैं।

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